“राष्ट्र धर्म की पुन: स्थापना ही भारत की सुरक्षा और समृद्धि का मार्ग: स्वामी विदेह योगी”
सोलन, 10 मई: आर्य समाज द्वारा आयोजित युवा एवं विद्यार्थी सम्मेलन तथा महिला सम्मेलन के अवसर पर स्वामी विदेह योगी ने कहा कि आज भारत को फिर से “राष्ट्र धर्म” के सिद्धांत पर चलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब-जब भारत पर संकट आया, आर्य समाज ने न केवल सजग प्रहरी की भूमिका निभाई, बल्कि हिंदू समाज को एकजुट कर उसे नई दिशा भी दी।

स्वामी विदेह योगी ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने 18वीं शताब्दी में भारत को स्वतंत्रता की ओर प्रेरित किया। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भी आर्य समाज की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि आजादी से पहले ही जब देश को धर्मनिरपेक्षता के नाम पर विभाजित किया गया, तब भी आर्य समाज ने इसका विरोध किया।
उन्होंने कहा कि “भारत को आज राष्ट्र धर्म की आवश्यकता है, क्योंकि राष्ट्र से पहले राष्ट्र धर्म आता है। जैसे विश्व के अन्य देश अपने-अपने धर्म के आधार पर नई सीमाएं खींचते जा रहे हैं, भारत को भी अपनी संस्कृति और धर्म के मूल सिद्धांतों पर लौटना होगा।”

स्वामी श्रद्धानंद के शुद्धि आंदोलन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, “शुद्धि का आंदोलन आज भी उतना ही आवश्यक है। जो हिंदू समाज किसी कारणवश अपना धर्म छोड़ चुके हैं, उन्हें पुनः सम्मानपूर्वक अपने मूल धर्म में लौटाने का कार्य समाज को करना चाहिए।”
सीमाओं की रक्षा और देश की अस्मिता
वर्तमान भारत-पाक तनाव पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि “हमारी सीमाएं असुरक्षित हैं और अब पाकिस्तान के आतंकवाद को निर्णायक उत्तर देने का समय आ चुका है।” उन्होंने अफसोस जताया कि भारत का एक बड़ा भूभाग पहले ही चीन और पाकिस्तान को सौंपा जा चुका है, और अब जो शेष भारत है, उसकी भी सुरक्षा के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
शिक्षा और युवाओं की दिशा
उन्होंने गुरुकुलों की पुनर्स्थापना की जरूरत पर बल दिया और कहा कि “अंग्रेजों ने जानबूझकर गुरुकुलों को समाप्त किया, क्योंकि वहीं से असंख्य देशभक्त तैयार होते थे।” आज के युवाओं को संस्कारवान बनाने और नशाखोरी व बेरोजगारी से बचाने के लिए रोजगारपरक शिक्षा की आवश्यकता है।

भारत: सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक संस्कृति
उन्होंने कहा कि “भारत दो करोड़ वर्ष पुरानी सभ्यता है जबकि अन्य देशों का इतिहास 2500 वर्षों से अधिक नहीं है। हमारी सनातन संस्कृति ही विश्व की सबसे वैज्ञानिक और हितकारी संस्कृति है।”
सम्मेलन में रही विशिष्ट उपस्थिति
कार्यक्रम में आर्य प्रतिनिधि सभा हिमाचल प्रदेश के प्रधान प्रबोध चंद्र सूद, सुधीर आर्य, डॉ. कर्म सिंह आर्य तथा पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
युवा सम्मेलन में आचार्य योगेश भारद्वाज ने युवाओं की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि अनुशासनहीनता, संस्कारहीनता और भटकाव युवाओं को राष्ट्र विरोधी दिशा में ले जा सकता है।
महिला सम्मेलन में प्रोफेसर सुवर्चाल चौहान, सुमन सूद, शशि मित्तल आदि ने स्वामी दयानंद और आर्य समाज द्वारा महिला उत्थान हेतु किए गए कार्यों की सराहना की और महिलाओं की भूमिका पर गहन चर्चा की।
इस अवसर पर समाजसेवा, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए हिमाचल प्रदेश की विभिन्न आर्य समाज संस्थाओं, विद्यार्थियों, महिलाओं और युवाओं को सम्मानित भी किया गया।

