लंदन में राहुल गांधी का RSS पर हमला

ब्रिटेन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर आरएसएस पर हमला बोला है। राहुल ने थिंक टैंक चैथम हाउस में बातचीत के दौरान आरएसएस की तुलना मिस्र के इस्लामी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से कर दी और उसे सीक्रेट सोसायटी बताया। राहुल गांधी ने यहां तक कह दिया कि कट्टरवादी फासीवाद है, जिसने देश के सभी संस्थानों पर कब्जा कर लिया है। निश्चय की राहुल गांधी के इस बयान से अब बवाल मचने वाला है। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह भी कहा कि पड़ोसियों के बीच बहुत अच्छे संबंध होने चाहिए, लेकिन जब पाकिस्तान जैसा पड़ोसी भारत में लगातार आतंकवाद फैला रहा है, तो उसके साथ अच्छे रिश्ते कैसे संभव हो सकते हैं।
राहुल गांधी ने अपनी यात्रा के दौरान यहां पाकिस्तान से संबंध को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि मेरा मानना है कि पड़ोसियों से अच्छे संबंध होने चाहिए, लेकिन… यह पाकिस्तान की कार्यशैली पर भी निर्भर करता है। पाकिस्तान भारत में आतंक को बढ़ावा देता है…ऐसी स्थिति में यह होने से रहा। पाकिस्तान यदि भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो फिर उससे अच्छे संबंध रखना बेहद मुश्किल है और इन दिनों कुछ ऐसी ही स्थिति भारत और पाकिस्तान के बीच बनी हुई है। आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को हराने और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि देखिए, खडग़े कांग्रेस के चुने हुए अध्यक्ष हैं। उनकी क्षमताओं पर मुझे पूरा भरोसा है, वह बहुत योग्य व्यक्ति हैं और सालों तक कांग्रेस के कार्यकर्ता रहे हैं। वहां से उठकर पार्टी के अध्यक्ष पद तक पहुंचना ही उनकी क्षमता का परिचय देता है, लेकिन इस समय मिलकर हम भाजपा को हराने की कोशिश कर रहे हैं।
राहुल गांधी से जब पूछा गया कि वह बार-बार लोकतंत्र पर खतरा होने की बात क्यों कहते हैं, तो इस पर उन्होंने कहा यह हमारा एक आतंरिक मामला है। हमारे देश का मामला है और इसका हल भी हम अंदर से ही निकाल लेंगे। हमें मिलकर इसका समाधान करना है। कांग्रेस नेता ने यौन उत्पीडऩ को सामने लाने में झिझक की मानसिकता से बाहर आने का आह्वान करते हुए कहा कि हमें अपनी बात कहने में झिझक नहीं होनी चाहिए। मेरे सामने उत्पीडऩ के कई मामले आए। मैं किसी खास मामले का जिक्र नहीं करना चाहूंगा, लेकिन ऐसे मामलों में पीडि़ता पुलिस के पास नहीं जाना चाहतीं, क्योंकि वे बदनामी से डरती हैं। ऐसे में महिलाओं को ताउम्र इस दर्द के साथ जिंदगी गुजारनी पड़ती है, जो समय के साथ-साथ बढ़ता जाता है। हम इस सोच को बदलना चाहेंगे कि आवाज उठाने से बदनामी होगी।

