व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा संतुलन व जी.एस.टी चोरी रोकना सरकार की जिम्मेदारी

व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा संतुलन व जी.एस.टी चोरी रोकना सरकार की जिम्मेदारी।

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दिवाली, पर चेहरे मुरझाए हुए। जी.एस.टी की चोरी व सी.सी.ई का पता नहीं सरकार को।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विवेक शर्मा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा।
मुख्यमंत्री का बयान 4 साल में हिमाचल होगा आत्मनिर्भर। झूठी गारंटीयों जैसा एक शगुफ्ता लगता है। क्योंकि एक सर्वेक्षण में पाया गया है की हिमाचल प्रदेश के 66% लोग ऑनलाइन सामान की खरीद-फरोख्त पसंद करते हैं। वह लोक लुभावने ऑफर्स के कारण ऑनलाइन ठगी का भी शिकार हो रहे हैं। प्रतिदिन पुलिस थानों में कंप्लेंट्स पहुंच रही है। वहीं दूसरी और प्रदेश का एक बड़ा व्यावसायिक वर्ग।
जिसे हम दुकानदार यां ट्रेडर्स कहते हैं उसका भविष्य भी खतरे में है। जिसे लेकर सरकार के पास ना कोई योजना है ना नियत ना नीति ऑनलाइन व्यवसाय के कारण उत्पन्न हो रही अनइथिकल प्रैक्टिसेज पर सरकार निरंतरण करने में असफल साबित हो रही है। जब के व्यापारियों का हित रखते हुए सरकार को “कंपटीशन कमिशन आफ इंडिया” में व्यापारी वर्ग की पैरवी करनी चाहिए लेकिन ऐसा संभव नहीं होगा क्योंकि सरकार के दामाद सरकारी अधिकारी आराम कर रहे हैं। कर्मचारी सी.सी.आई को लेकर अनभिज्ञ है।व सरकार अंतर कलह से ग्रसित है जब के अंतरराष्ट्रीय वर्ल्ड ट्रेड साइन करते समय 1994 में तत्काल नरसिम्हा राव सरकार जिन छोटे व्यापारियों के हितों को लेकर अज्ञानता की स्थिति में थी तत्कालीन वाजपेई सरकार ने 2002 में कंपटीशन कमिशन, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का गठन किया था। ताकि भारत में सदियों से चल रहे बाजार व उसकी रौनक बरकरार रहे। वर्तमान केंद्र की सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए
2023 में व्यापारियों के हित में कई नए कानूनी परिवर्तन प्रतिस्पर्धा को लेकर किए हैं वह उनके व्यापारिक हकों को सुरक्षित किया है। दुर्भाग्य वश् प्रदेश सरकार जो रोजगार की झूठी गारंटरयां देकर सत्ता में आई है। उन्हें कम से कम स्वयं रोजगार में लगे छोटे व्यापारियों के हकों की लड़ाई सी.सी.आई के समक्ष ऑनलाइन की प्रतिस्पर्धा का मामला अवश्य उठाना चाहिए जिसे केवल व्यवसाय व्यापारी वर्ग को रहता ही नहीं मिलेगी, अपितु वित्तीय संकटों का रोना रो रही सरकार को जी.एस.टी कलेक्शन में भी लाभ होगा
आज ऑनलाइन सामान बेचने वाली बहुत सी कंपनियां जी.एस.टी की चोरी कर रही हैं। कोरियर के माध्यम से प्रदेश में आ रहा सामान कंज्यूमर एंड पर खत्म हो जाता है। जिसके बल का कोई रिकॉर्ड मेंटेन नहीं होता डायरेक्ट मैन्युफैक्चर्ड से कंज्यूमर तक जाने वाला समान पर टैक्स की चोरी बड़े स्तर पर हो रही है। विवेक शर्मा ने यह प्रश्न खड़ा किया है।

बड़ी ऑनलाइन समान बेचने वाली कंपनियां जिस प्रकार 80 से 90% तक डिस्काउंट ऑफर कर रही है। यह मिनिमम सेल प्राइस व टैक्स चोरी का मामला है। यह प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन है। प्रदेश सरकार को यह मामला सी.सी.आई के समक्ष उठाने चाहिए प्रदेश के वित्तीय सचिव इसके लिए सीधे-सीधे जिम्मेवार है विभाग मुख्यमंत्री के पास होने के कारण वह भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते
जहां पर यह जी.एस.टी की चोरी का मामला बनता है। वहीं स्थानीय प्रदेश के व्यापारियों के साथ यह शोषण व अपराधिक मामला भी है। कंपटीशन व्यवस्था पर निरंतरण बनाए रखना और व्यापार की स्वतंत्रता को सुरक्षित करना प्रदेश सरकार की नैतिक जिम्मेवारी होती है।

जबकि केंद्र सरकार ने 2023 में सी,.सी.आई के कानून में प्रावधान करते हुए विश्य की सुनवाई 30 दिन में करने व न्याय 150 दिन में करने का प्रावधान रखा है। आखिर प्रदेश सरकार व्यापारियों के हितों को संजीदगी की से क्यों नहीं लेना चाहती है। ऑनलाइन सामान बेचने के मामले उसमें मूल्य निर्धारण के विषय पर बहुत सख्त कानून केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए गए हैं। शर्मा ने पूछा है।
क्या जी.एस.टी काउंसिल की मीटिंग में मंत्री महोदय व अधिकारी केवल सैर सपाटे के लिए जाते हैं या प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई लड़ने यह अपने आप में एक बड़ा प्रश्न है। आज दीपावली का त्यौहार सर पर है बाजारों से रौनक गायब है व्यापारी मुरझाए हुए बैठे हैं। सरकार के पास सरकार के पास संवाद के लिए भी विषय नहीं है।
सुख की सरकार में ऐसा प्रतीत होता है अधिकारी मस्त जनता त्रस्त व सरकार पस्त है।

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