चुनाव आयोग पर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी भारी — प्रदेश में संवैधानिक संकट : विवेक शर्मा

सोलन: हिमाचल में इलेक्शन कमीशन और अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी के मध्य पत्राचार को संवैधानिक संकट बताते हुए विवेक शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी स्वतंत्र संस्थानों पर हमला करके भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को धूमिल करने का षड्यंत्र चला रहे हैं।

इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया आज राहुल गांधी के निशाने पर है। बिहार में विदेशी नागरिकों को वोटर लिस्ट से बाहर करने पर वह चिंतित हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नागरिकता की पूछताछ करना इलेक्शन कमीशन का नहीं, अपितु गृह मंत्रालय का कार्य है।

हिमाचल प्रदेश, जहाँ 97% हिन्दू आबादी निवास करती है, वहाँ 24 मई 2025 को प्रदेश इलेक्शन कमीशन ने स्थानीय अर्बन बॉडी के चुनावों को लेकर 8 सूत्रीय अधिसूचना जारी की थी। लेकिन अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने इस अधिसूचना की धज्जियाँ उड़ा दीं।

24 मई 2025 के पत्र की क्रम संख्या 7 के अनुसार, वार्डों के आरक्षण व सीमांकन की अंतिम तिथि 11 जुलाई 2025 निर्धारित की गई थी। लेकिन ठीक उसी दिन, 11 जुलाई को ही अर्बन डेवलपमेंट के स्पेशल सेक्रेटरी ने इलेक्शन कमीशन को सूचित किया कि यह कार्य स्थगित कर दिया गया है और अब कैबिनेट में चर्चा के बाद ही निर्णय साझा किया जाएगा।

उसी दिन, यानी 11 जुलाई 2025 को ही स्टेट इलेक्शन कमीशन ने सभी ज़िलाधीशों को पत्र लिखकर निर्देश दिए कि 15 जुलाई तक रोस्टर के अनुसार कार्य सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए इलेक्शन रूल 2012 का हवाला दिया गया और बताया गया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सभी ज़िलाधीश व कर्मचारी इलेक्शन डिपार्टमेंट के अधीन माने जाते हैं।

यहाँ एक बड़ा प्रश्न यह है कि यदि 9 जुलाई 2025 को ही रिज़र्वेशन रोस्टर पर न्यायालय द्वारा स्टे मिल गया था, तो फ़िर राज्य सरकार ने इसकी जानकारी चुनाव आयोग को पहले क्यों नहीं दी? क्या जानकारी को जानबूझकर दबाया गया?

इसके बाद 17 जुलाई को प्रदेश इलेक्शन कमीशन ने सभी ज़िलाधीशों को सूचित किया कि अब स्टे समाप्त हो चुका है और रोस्टर पर पुनः काम शुरू करने की अंतिम तिथि 22 जुलाई 2025, सांय 5:00 बजे तक निर्धारित की गई है।

लेकिन सरकार की दादागिरी यहीं नहीं रुकी। 22 जुलाई 2025 को दिवेश कुमार, प्रिंसिपल सेक्रेटरी (अर्बन डेवलपमेंट), ने इलेक्शन कमीशन को पत्र लिखकर सूचित किया कि हमने 28 जून 2025 को आरक्षण रोस्टर से संबंधित प्रस्ताव कैबिनेट में रखा था और अब 24 जुलाई 2025 को पुनः प्रस्तावित करेंगे। जो कैबिनेट अब जाकर स्थापित हुई है।

यानी अब अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी, इलेक्शन कमीशन से ऊपर हो गई है? जबकि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों को “अर्जेंसी की भावना” से कार्य करने की टिप्पणी दे चुका है।

विवेक शर्मा ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर प्रदेश सरकार हमला कर रही है। हिमाचल की 61 अर्बन लोकल बॉडीज़ — जिनमें 5 म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, 29 म्युनिसिपल काउंसिल्स और 27 नगर पंचायतें सम्मिलित हैं — को संवैधानिक रूप से कमज़ोर करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।

अब प्रश्न ये है कि इस संवैधानिक संकट का ज़िम्मेदार कौन है? और यह कौन से संविधानिक प्रावधान के अंतर्गत लोकल बॉडी का रोस्टर कैबिनेट में डिस्कस हो रहा है, जबकि 1 जून 1993 को 74वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 243Q से 243ZG तक लोकल बॉडीज़ को एक स्वतंत्र संस्था माना गया है।

यदि चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है, तो प्रदेश सरकार का इस प्रकार हस्तक्षेप करना यह स्पष्ट करता है कि वह लोकतंत्र का गला घोंट रही है।

इस संवैधानिक संकट के पीछे मुख्य कारण सरकार की विफ़लताएं, सामने खड़ी हार और आंतरिक विरोध हैं।

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