राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना दिवस पर विशेष ✦

विजयादशमी का पर्व पूरे देश में असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन वर्ष 1925 को डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना की थी। यही कारण है कि संघ हर वर्ष विजयादशमी के अवसर को अपने स्थापना दिवस के रूप में बड़े उत्साह और अनुशासन के साथ मनाता है।
स्थापना का उद्देश्य
उस दौर में भारत अंग्रेजों की गुलामी झेल रहा था और समाज आंतरिक कुरीतियों तथा विघटन से जूझ रहा था। डॉ. हेडगेवार ने समाज को संगठित करने, युवाओं में राष्ट्रभक्ति जगाने और भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण के लिए संघ की नींव रखी।
स्थापना दिवस का स्वरूप
स्थापना दिवस के अवसर पर देशभर की शाखाओं में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। स्वयंसेवक गणवेश धारण कर पथ-संचलन करते हैं, शस्त्र-पूजन होता है और संगठन की आगामी दिशा पर विचार-विमर्श किया जाता है। इस अवसर पर प्रमुख वक्ता समाज और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेश देते हैं।
संघ की भूमिका
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतना बन चुका है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामोन्नति में योगदान
प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य
पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी आंदोलन का प्रसार
युवाओं में अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना का विकास
वर्तमान परिदृश्य
आज RSS दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन माना जाता है। करोड़ों स्वयंसेवक विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं और समाजसेवा को राष्ट्रसेवा का स्वरूप देने में जुटे हैं।
निष्कर्ष
संघ का स्थापना दिवस केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्ममंथन और नए संकल्प का अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि संगठित समाज ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होता है। डॉ. हेडगेवार का सपना आत्मनिर्भर, संस्कारित और विश्व को दिशा देने वाले भारत का था—और उसी दिशा में संघ निरंतर प्रयासरत है।

