धर्मशाला केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) के गुनहगार हैं सभी नेता और सरकारें

चौदह साल से सूली पर लटक रहे केंद्रीय विश्वविद्यालय के अस्तित्व को लेकर अब कांगड़ा-चंबा के लिए सांसद किशन कपूर ने कमान संभाली ली है। वह धर्मशाला के लिए मिले इस केंद्रीय संस्थान को लेकर हुई अब तक की सियासत पर न कांग्रेस और न ही भाजपा को बख्शते हैं। सांसद आश्चर्य प्रकट करते हैं कि पांवटा साहिब में आईआईएम, हमीरपुर में एनआईटी, टेक्नीकल विश्वविद्यालय, भारतीय होटल प्रबंधन संस्थान, ऊना में ट्रिपल आईटी, पीजीआई सेटेलाइट सेंटर, मंडी में आईआईटी, वल्लभ व मेडिकल यूनिवर्सिटी, बिलासपुर में हाइड्रो इंजीनियर व एम्स जैसे अनेक संस्थान हो सकते हैं, तो अंग्रजों के जमाने से शिक्षा के हब रहे धर्मशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकारों का भेदभाव क्यों। कांगड़ा की पृष्ठभूमि से छेड़छाड़ व प्रगति के साथ हो रही हर तरह की सियासत का सांसद किशन कपूर सीधे-सीधे विरोध कर रहे हैं। कांगड़ा जिला के अनेक सवालों पर वह बड़ी ही बेबाकी और साफगोई के साथ ‘दिव्य हिमाचल’ के स्थानीय संपादक, संजय अवस्थी के साथ रू-ब-रू हो रहे है

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