हिमाचल के मामलों का हो निपटारा,केंद्र को लिखा पत्र:सुक्खू
शिमला कार्यालय में हिमाचल के मामलों का हो निपटारा, केंद्र को लिखा पत्र : सुक्खूमुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का जो ऑफिस शिमला में है, उसमें अभी दूसरे राज्य के मामले वन मंजूरियों के लिए आ रहे हैं। हिमाचल सरकार ने केंद्र को पत्र लिखा है, जिसमें इस ऑफिस में केवल हिमाचल के मामलों को निपटाया जाए। अब यहां पांच राज्यों के मामलों को निपटाया जा रहा है।
प्रदेश के विकास परियोजनाओं को जल्द वन मंजूरी मिलेगी। प्रदेश में स्कूल, सड़कें और अन्य ऐसे कई प्रोजेक्ट हैं, जहां वन विभाग की जमीन है। समय रहते वन मंजूरी नहीं मिलने से विकास कार्यों में बधाएं उत्पन्न हो रही थीं।
हिमाचल प्रदेश के विकास परियोजनाओं को जल्द वन मंजूरी मिलेगी। प्रदेश में स्कूल, सड़कें और अन्य ऐसे कई प्रोजेक्ट हैं, जहां वन विभाग की जमीन है। समय रहते वन मंजूरी नहीं मिलने से विकास कार्यों में बधाएं उत्पन्न हो रही थीं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि एफसीए और एफआरए मामलों को जल्द अपलोड करने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था की है। जिला स्तर पर डीसी और डीएफओ वाली कमेटी की हर 15 दिन में बैठक करेगी। जिला स्तर की कमेटियां यूजर एजेंसी के साथ बैठकर मामलों को फारेस्ट क्लीयरेंस (वन मंजूरी) के लिए अपलोड करेंगी। दस्तावेज एकत्र करने का काम यूजर एजेंसी का होगा। अगर समय पर केस अपलोड होंगे तो उनको मंजूरियां भी समय पर मिलेंगी। पहले समय पर केस अपलोड नहीं हो रहे थे, जिससे इनकी मंजूरियां भी लटक रही थीं।
मुख्यमंत्री ने यह जानकारी विधानसभा प्राइवेट मेंबर डे पर विधायक राजेश धर्माणी की ओर से लाए गए संकल्प प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में दी। धर्माणी ने सदन में वन भूमि पर बिना वन मंजूरी की बनी सड़कों और भवनों को एक मुश्त छूट देने का संकल्प प्रस्ताव लाया। सीएम ने कहा कि सरकार ने केंद्र के अधीन काम कर रही एक निजी कंपनी को हायर किया है। सभी विकासात्मक परियोजनाओं के लिए पूरी मंजूरी दिलाने की जिम्मेवारी इस एजेंसी की होगी। इसके अलावा एफआरए मामलों को डील करने के लिए सरकार ने अलग से एक अरण्यपाल की तैनाती की गई है। सरकार की पहल से अब सुप्रीम कोर्ट ने एफआरए के केसों की मानीटरिंग करना बंद कर दिया है। अब एफआरए कमेटियां ही इन केसों को फाइनल कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा 1980 से पहले के बनी सड़कों और भवनों पर एफसीए लागू नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1980 से पहले बने भवनों, सड़कों आदि पर वन संरक्षण कानून लागू नहीं होता है। उन्होंने कहा कि इससे पहले के बने भवनों आदि के लिए इसकी मंजूरी जरूरी नहीं है। वन संरक्षण कानून 1980 में लागू किया गया था। ऐसे में इससे पहले के भवनों आदि पर लागू नहीं होता है। इन मामलों को साइट पर अपलोड किया जाएगा, इसमें कुछ पेनल्टी लगेगी।
हिमाचल में 2183 सड़कें फारेस्ट वायलेशन से बनीं
मुख्यमंत्री ने कहा है कि हिमाचल में करीब 2183 सड़कें वन भूमि पर बनाई गई हैं जिनके लिए वन मंजूरियां नहीं ली गईं। इन सभी की अलग से मंजूरियां लेनी होंगी। इसी तरह अन्य विभागों के तहत बनी सड़कों को भी एफसीए के तहत मंजूरी लेनी पड़ेगी। भूमिहीनों को घरों के लिए तीन बिस्वा जमीन देने की सरकार की नीति पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इन लोगों को पुल से जमीन देने पर विचार कर रही है।
बिना मंजूरी की सड़कों, भवनों को एक मुश्त मंजूरी दे सरकार
घुमारवीं से कांग्रेस विधायक राजेश धर्माणी ने हिमाचल में वन मंजूरी न मिलने से रुके विकास कार्यों और 1980 से पहले बने स्कूल को फारेस्ट क्लीयरेंस न मिलने को लेकर संकल्प प्रस्ताव लाया। उन्होंने सरकार से ये मामले निपटाने के लिए नीति बनाने की मांग की। धर्माणी ने कहा कि हिमाचल में बड़ी संख्या में सड़कें, स्कूल हैं, जो बिना वन मंजूरी बनाए गए हैं। इनमें काफी संख्या में 1980 से पहले बने हैं। 13 तरह के कार्यों के लिए एक हेक्टेयर तक भूमि के लिए एफसीए की मंजूरी जरूरी नहीं है। इसके लिए एफआरए के तहत मंजूरी देने का प्रावधान है।
ग्रामीण विकास विभाग, अन्य विभागों या अन्य प्लान के तहत बनी सड़कों को पक्का करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लाहौल-स्पीति का पॉलिटेक्नीक कॉलेज भी फंसा है। चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र की 70 सड़कें फारेस्ट क्लीयरेंस के कारण फंसी हैं। विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि देव समाज आस्था का प्रतीक है। सैकड़ों मंदिर और गोसदन का निर्माण कार्य फंसा है। विधायक देवेंद्र भुट्टो केवल सिंह पठानिया, संजय रत्न, सुरेंद्र शौरी, विनोद कुमार, भुवनेश्वर गौड़ और सीपीएस रामकुमार,


