मंदिरों के धन का उपयोग किसी और कार्य के लिया सनातन संस्कृति के हित में नहीं : बिंदल

बिलासपुर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने कहा कि सुखविंद्र सिंह सुक्खू की कांग्रेस मंदिर विरोधी सरकार ने एक पत्र निकाला कि मंदिरों का जो चढ़ावा है वह सरकारी कोष के माध्यम से अन्य प्रकार के विकास कार्यों में व्यय किया जाए और उस हेतु जो हमारे मंदिर है उनकी धनराशि जिलाधीश सरकारी कोष में जमा कराने हेतु उनको आदेश दिए गए हैं। हजारों लाखों साल से जो भारतीय संस्कृति है, सनातन संस्कृति है, उनका यह आधार रहे हैं, बड़े मंदिर यहां पर जो धर्म समाज देकर के जाता है उससे धार्मिक कार्यों का विस्तार होता रहा है। वह चाहे ब्राह्मण है उनके परिवारों का भरण पोषण हो, वह चाहे संस्कृत का प्रचार प्रसार हो या फिर मंदिर परिसर में आने वाले हजारों लाखों यात्रियों की सुख सुविधा की दृष्टि से विकास किए जाना हो वह मंदिरों के धन से किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कुछ बड़े मंदिर है जहां चढ़ावा ज्यादा होता है, पर हजारों ऐसे छोटे मंदिर हैं जहां पर नित्य प्रति की पूजा अर्चना करने के लिए भी उनके पास साधनों की उपलब्धता नहीं रहती है, वह भी इन बड़े मंदिरों के माध्यम से दिया जाना चाहिए और इस प्रकार की नियमावली हिमाचल प्रदेश में पहले बनाई जा चुकी है और उस नियमावली के माध्यम से अनेको छोटे मंदिर उनका रखरखाव वहां पर गृत हवन सामग्री इत्यादि की व्यवस्था, वहां पर काम करने वाला पुजारी संत उनकी व्यवस्था उसके माध्यम से होती है अथवा गौशालाओं का संचालन और वह मंदिर परिसर के अधीन उसी प्रकार से किया जा सकता है। अन्य विकास कार्यों के लिए इन मंदिरों के धन का उपयोग यह कदापि और हिंदू समाज और सनातन संस्कृति के हित में नहीं है और जो हमारे सनातन के अन्य कार्य हैं उनके लिए वह धनराशि उपयोग में यदि नहीं आएगी तो मंदिरों का रखरखाव और व्यवस्थाएं कमजोर पड़ जाएंगी, इसलिए नियमावली बनाई है और हमारा आग्रह है मुख्यमंत्री जी से कि मंदिरों की राशि केवल और केवल हमारे और सनातन के धार्मिक अनुष्ठानों कार्यक्रमों और मंदिरों के विकास रखरखाव में ही व्यय हो, गौशालाओं के लिए हो और पुजारी जो संत लोग हैं उनकी व्यवस्था में ही वो व्यय होना चाहिए।

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