एसएलटीपी प्रतिभागियों ने सीआईपीएमसी चम्बाघाट स्थित जैव-नियंत्रण प्रयोगशाला का किया भ्रमण

सोलन में सब्जियों में एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम) पर आयोजित सीजन लॉन्ग ट्रेनिंग प्रोग्राम (SLTP) सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का तृतीय सप्ताह 19 जनवरी से 25 जनवरी 2026 तक सम्पन्न हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।इस दौरान वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय (DPPQS), फरीदाबाद के वरिष्ठ अधिकारियों तथा डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (UHF), नौणी के विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर विशेष व्याख्यान दिए गए।श्री ज्ञानेश्वर बंचोर, उप निदेशक (कीट विज्ञान), DPPQS द्वारा निर्यात संवर्धन में आईपीएम की भूमिका एवं सब्जी फसलों में रस-चूसक कीटों के प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं डॉ. शिवाजी वावरे, उप निदेशक (पादप रोग विज्ञान), DPPQS ने एसपीएस समझौते एवं विश्व व्यापार संगठन (WTO) से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम में डॉ. मिथिलेश आर्य, उप निदेशक, सीआईपीएमसी जम्मू ने सब्जियों में समेकित रोग प्रबंधन पर उपयोगी व्याख्यान दिया, जबकि डॉ. पी.सी. भारद्वाज, सहायक निदेशक, सीआईपीएमसी जालंधर ने भी प्रतिभागियों को व्यवहारिक जानकारियाँ प्रदान कीं।इसके अतिरिक्त, डॉ. राकेश शर्मा, विभागाध्यक्ष खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, UHF नौणी ने फलों एवं सब्जियों में उद्यमिता विकास एवं मूल्य संवर्धन पर प्रेरणादायक व्याख्यान दिया। डॉ. अंजली चौहान, सह-प्राध्यापक, मृदा विज्ञान विभाग ने पादप वृद्धि प्रोत्साहक राइजोबैक्टीरिया (PGPR) की भूमिका पर प्रकाश डाला, वहीं डॉ. कुलदीप सिंह ठाकुर, सह-प्राध्यापक, सब्जी विज्ञान विभाग ने प्राकृतिक खेती के महत्व पर जानकारी साझा की।कक्षा शिक्षण के साथ-साथ प्रतिभागियों ने सीआईपीएमसी, चम्बाघाट, सोलन स्थित जैव-नियंत्रण प्रयोगशाला का भ्रमण भी किया। इस अवसर पर उन्हें ट्राइकोडर्मा जैसे कवक आधारित जैव-कीटनाशकों के बड़े पैमाने पर उत्पादन की तकनीकों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने तकनीकी अधिकारियों के मार्गदर्शन में ट्राइकोडर्मा पाउडर द्वारा गोबर की खाद (FYM) के संवर्धन जैसी व्यावहारिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की। साथ ही खेतों में उपयोग होने वाले विभिन्न जैव-नियंत्रण कारकों के सामूहिक पालन (मास रियरिंग) की तकनीकों से भी अवगत कराया गया।यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव का समन्वय करते हुए सब्जी फसलों में एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

