राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कोठी देवरा की मशरूम पहल बनी मिसाल, अब कॉम्प्लेक्स के अन्य विद्यालयों तक पहुँची तकनीक

सोलन।
राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कोठी देवरा, शिक्षा खंड सोलन, जिला सोलन में व्यावसायिक शिक्षा (एग्रीकल्चर ट्रेड) के अंतर्गत ऑयस्टर (ढिंगरी) मशरूम उत्पादन की अभिनव पहल विद्यार्थियों के लिए व्यवहारिक एवं कौशल आधारित शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण बन रही है। विद्यालय में विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे उनमें वैज्ञानिक खेती, पोषण तथा स्वरोजगार के प्रति जागरूकता विकसित हो रही है।
विद्यालय की वोकेशनल ट्रेनर नेहा वर्मा के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने अब तक लगभग 8 किलोग्राम ऑयस्टर (ढिंगरी) मशरूम का सफल उत्पादन किया है। तैयार मशरूम का उपयोग विद्यालय के मिड-डे मील में किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को प्रोटीन एवं अन्य पोषक तत्वों से भरपूर पौष्टिक आहार उपलब्ध हो रहा है। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थी मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को व्यवहारिक रूप से सीख रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि फरवरी 2026 में नेहा वर्मा ने उप निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग द्वारा भारती एयरटेल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित शिक्षक एक्सपोज़र कार्यक्रम के अंतर्गत मशरूम अनुसंधान निदेशालय, चंबाघाट (सोलन) में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया था। प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और तकनीकों को उन्होंने सफलतापूर्वक विद्यालय में लागू किया। इसके उपरांत उन्होंने कॉम्प्लेक्स के अंतर्गत आने वाले विद्यालयों के शिक्षकों को भी मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण प्रदान किया, जिसके परिणामस्वरूप कई क्लस्टर विद्यालयों ने भी अपने परिसर में ऑयस्टर (ढिंगरी) मशरूम उत्पादन प्रारम्भ कर दिया है। इस प्रकार कोठी देवरा विद्यालय कौशल आधारित कृषि शिक्षा के प्रसार का एक प्रेरणादायक केंद्र बनकर उभरा है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य शिव प्रभाकर ने इस अवसर पर कहा, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य विद्यार्थियों को अनुभवात्मक एवं कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ना है। मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों में नवाचार, आत्मविश्वास, वैज्ञानिक सोच और उद्यमिता की भावना विकसित करती हैं। हमें प्रसन्नता है कि इस पहल का लाभ केवल हमारे विद्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कॉम्प्लेक्स के अन्य विद्यालय भी इससे प्रेरित होकर मशरूम उत्पादन की दिशा में आगे बढ़े हैं। इसके लिए मैं उप निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग तथा भारती एयरटेल फाउंडेशन का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके सहयोग से प्राप्त प्रशिक्षण ने इस पहल को व्यापक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”
विद्यालय परिवार का मानना है कि इस प्रकार की कौशल आधारित गतिविधियाँ विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख, आत्मनिर्भर एवं नवाचारी बनाने के साथ-साथ विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक शिक्षा को भी सशक्त बना रही हैं।
