सोलन की बेटी ज्योति ठाकुर ने एशियाई खेलों में रचा इतिहास; स्वर्ण पदक जीतकर बढ़ाया हिमाचल का गौरव

एशियाई खेलों में भारतीय महिला कबड्डी टीम के साथ स्वर्ण पदक जीतकर सोलन ज़िले की बेटी ज्योति ठाकुर ने एक बार फ़िर पूरे देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। फ़ाइनल मुकाबले में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने ईरान को हराकर यह स्वर्णिम सफ़लता प्राप्त की।
ज्योति ठाकुर सोलन ज़िले के कण्डाघाट उपमण्डल के जखेड़ गांव की निवासी हैं। एशियाई खेलों में यह उनका लगातार दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले भी वे वर्ष 2022 में हांगझोउ (चीन) में आयोजित एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम का हिस्सा रह चुकी हैं।
चार वर्ष की आयु से शुरू हुआ स्वर्णिम सफ़र:
ज्योति ने मात्र 4 वर्ष की आयु में कबड्डी खेलना शुरू कर दिया था। प्रारंभिक शिक्षा कण्डाघाट के सरकारी स्कूल और 12वीं की पढ़ाई राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सोलन से पूरी करने के बाद उन्होंने अपनी खेल प्रतिभा को निखारा। इसके पश्चात् उनका चयन भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के धर्मशाला स्थित ‘नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस’ में हुआ, जहाँ उन्हें उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मिला।
परिवार में खुशी का वातावरण:
ज्योति के पिता सुरेश ठाकुर (पूर्व कबड्डी खिलाड़ी) और माता अनीता ठाकुर अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर गदगद हैं। ज्योति की दोनों बड़ी बहनें, अर्चना और कविता भी कबड्डी खिलाड़ी रही हैं तथा वर्तमान में वन विभाग में सेवारत हैं। पिता सुरेश ठाकुर ने बताया कि सीमित संसाधनों और गांव में शुरुआती सुविधाओं की कमी के बावजूद ज्योति ने हार नहीं मानी। शुक्रवार सांय पूरे परिवार ने एक साथ टीवी पर फ़ाइनल मुकाबला देखा और जीत का जश्न मनाया।
क्षेत्रवासियों को घर वापसी की प्रतीक्षा:
एशियाई खेलों में भारतीय महिला कबड्डी टीम की यह ऐतिहासिक जीत हिमाचल प्रदेश की खेल प्रतिभा को वैश्विक मंच पर स्थापित करती है। ज्योति ठाकुर की यह उपलब्धि सोलन और प्रदेश की युवा महिला खिलाड़ियों के लिए एक महान प्रेरणा बनकर उभरी है।
कण्डाघाट स्थित उनके पैतृक गाँव और सोलन ज़िले के लोगों को अब ज्योति के स्वदेश लौटने की बेसब्री से प्रतीक्षा है, ताकि उनका भव्य स्वागत किया जा सके।
