अब लहसुन, प्याज और मटर पर भी पड़ने लगी मार,संकट में देवभूमि का अन्नदाता

हिमाचल सूखे जैसी स्थिति की चपेट में है। सेब, गेहूं के बाद अब लहसुन, मटर, गोभी, प्याज और अन्य सब्जियों पर भी मार पड़ने लगी है। सब्जी उत्पादक जिलों के किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है पेयजल स्रोत भी सूखने लगे हैं। पांच हजार करोड़ की आर्थिकी वाले सेब के बाद गेहूं की फसल भी सूखे की चपेट में है। अभी तक के अनुमान के अनुसार गेहूं का उत्पादन 15 फीसदी कम रहेगा। अगले कुछ हफ्तों तक जारी रहती है तो गेहूं की पैदावार में 15 से 25 फीसदी तक गिरावट होगी। सब्जियों में भी 25 से 30 फीसदी तक नुकसान हो सकता है। पच्छाद उपमंडल की 34 पंचायतों में लहसुन समेत अन्य फसलें 30 फीसदी तक प्रभावित हो चुकी हैं। समय पर पर्याप्त बर्फ बारी न होने से गुठलीदार फलों की फ्लावरिंग और सेटिंग प्रक्रिया का क्रम गड़बड़ा गया है। हिमाचल के 85 फीसदी से अधिक किसान और बागवान सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर हैं।
प्रदेश में गुठलीदार फलों का हर साल 500 से 700 करोड रुपये का कारोबार किया जाता है। अकेले चेरी की पैदावार 200 से 250 करोड़ रुपये की रहती है। इसके अलावा प्लम, खुमानी, आड़ूू, बादाम, नेक्ट्रीन आदि का उत्पादन भी बागवान करते हैं। बागवान चिंतित हैं कि समय से पहले स्टोन फ्रूट्स के पेड़ों में फूल खिलने लगे हैं। इससे फलों के झड़ने और गुणवत्ता पर भी विपरीत असर पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक सोलन जिले में गेहूं की फसल को करीब 6.25 करोड़ का नुकसान हो चुका है। सब्जी उत्पादकों को भी करीब 2.25 करोड़ का नुकसान हुआ है। कृषि निदेशक डॉ. राजेश कौशिक कहते हैं कि बारिश समय पर नहीं होने से पांच जिलों में रबी फसलों को 15 फीसदी तक नुकसान हुआ है। कुछ दिनों में बारिश होती है तो किसानों को थोड़ी राहत मिलेगी। बारिश कम होने से गेहूं और जौ के बीज की गुणवत्ता कम रहेगी। इन दिनों किसानों ने मटर, गोभी आदि सब्जियों की बिजाई भी की है। सूखे जैसे स्थिति से जिला हमीरपुर, बिलासपुर, सोलन, सिरमौर और शिमला में किसानों को फसली नुकसान ज्यादा हुआ है।
हिमाचल प्रदेश फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि बारिश और बर्फबारी कम होने से गुठलीदार फलों और सेब के पेडों पर सूखे जैसी स्थिति की मार पड़ रही है। बगीचों में नमी के लिए बर्फबारी और बारिश काफी कम हुई है।
राज्य में सूखे जैसी स्थिति से करीब 700 छोटी पेयजल योजनाओं का जलस्तर 15 से 25 फीसदी तक घटा है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को योजना तैयार करके मुख्यालय में भेजने को कहा है। इसके अलावा सभी जिलों के उपायुक्तों से कहा गया है कि पानी के संकट से निपटने के लिए टैंकर की व्यवस्था रखें। बारिश न होने से पानी के स्रोतों का जलस्तर घट रहा है। सोमवार तक फील्ड से रिपोर्ट मांगी गई है। जिलों के जल शक्ति विभाग के अधिकारियों से पेयजल संकट से निपटने को प्लान मांगा गया है। इसके तहत एक सोर्स को दूसरे से भी जोड़ा जा सकेगा। बोरवैल से भी पानी उपलब्ध होगा।

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