जगदम्बा रामलीला मंडल सोलन द्वारा तीसरे दिन की रामलीला मंचन मे रावण, कुभकरण, विभीषण द्वारा घोर तपस्या करके वरदान प्राप्त करने व राजा दशरथ को पुत्र नहीं होने पर उन्हें श्रृंगि ऋषि द्वारा पुत्रेष्ठि यज्ञ कराने का सलाह दिया गया जिसके बाद राजा दशरथ ने इनसे पुत्रेष्ठि यज्ञ कराया इसके बाद भगवान राम सहित अन्य पुत्र रत्न की प्राप्ति लक्ष्मण, भरत, शत्रुध्न के जन्म की लीला के साथ सीता जी के प्रकट होने की लीला राजा जनक ने ऋषि-मुनियों के कहे मुताबिक वैशाख महीने के शुक्लपक्ष की नवमी को खेत में हल चलाया। इसी दौरान उनके हल से कलश टकराया। जिसमें एक कन्या थी। राजा जनक ने कलश में मिली कन्या को अपनी पुत्री मानकर उनका पालन-पोषण किया। हल के अगले हिस्से को सीत कहा जाता है। इसलिए राजा जनक ने हल जोतने पर मिली उस कन्या का नाम सीता रखा। राजा की कोई संतान नहीं थी। इसलिए वो खुश हुए। सीता को जानकी और मिथिलेश कुमारी जैसे नामों से भी जाना जाता है व तडका वध की लीला का मंचन किया गया। अपनी कुरूपता को देखकर और अपने पति की मृत्यु का बदला लेने के लिये ताड़का ने अगस्त्य मुनि के आश्रम को नष्ट करने का संकल्प किया। इसलिये ऋषि विश्वामित्र ने ताड़का का वध राम के हाथों करवा दिया।गंज बजार जय श्री राम जय सीता राम के उदघोष से गुंज उठा। ताडका वध के समय रामलीला स्थल बहुत है भयानक सा दिख रहा था तडका गरज रही थी अंत मे राम ने विश्वामित्र के कहने से तडका का वध किया इस समय राम की जय जय कार हुई।मुख्यअतिथी के रूप मे जन कल्याण सेवा समिती सोलन के प्रधान राकेश शर्मा मंडल के प्रधान मुकेश गुप्ता, निर्देशक हरिश मरवाह, सह निर्देशक राकेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष मनोज गुप्ता ने उन्हे समृती चिन्ह देकर सम्मानित किया। राकेश शर्मा ने कहा की 42 वर्ष तक रामलीला मंचन को निभाने के लिए मंडल के सभी सदस्यो की जितनी तारीफ की जाए कम है।
रामलीला से सभी को एक संदेश
जिसने अपने प्रदेश की जनता की भलाई के लिए हल मे बैलो की जगह खुद को और अपनी रानी को जोत दिया।
राम ने ताडका के वध से पहले ऋषि विश्वामित्र को कहा तड़का एक स्त्री है मैं स्त्री पर बान कैसे चल सकता हूं। इससे यह संदेश राम ने दिया की स्त्री जाति का हमेशा सम्मान करो।
रामलीला मे प्रश्नों के उत्तर देकर अधरवपुरी, सीमा, कनक ने ईनाम जीते।




