सीरिया और तुर्की ने भारत के भूकंप की याद दिला दी

सीरिया और तुर्की में भूकंप से मची तबाही में अभी भी एक आस जिंदा है कि शायद कोई और जिंदा आदमी चमत्कारी रूप से बाहर निकल जाए। भूकंप ग्रस्त क्षेत्र में राहत कार्य बहुत बड़े पैमाने पर चल रहे हैं। भारत में भी उस समय को याद किया जा रहा है जब उत्तराखंड के उत्तरकाशी और महाराष्ट्र के लातूर और गुजरात में भूकंप ने विनाश लीला खेली थी। सीरिया में भी भूकंप का नजार कुछ वैसा ही है। वहां छह हजार से ज्यादा इमारतें धराशाई हो गई हैं। मलवे में दबे लोगों को जिंदा बचाने की आस में बचाव का काम भी जारी है। लाशों को सड़ने से पहले उनका अंतिम संस्कार करने का इंतजाम भी साथ साथ किया जा रहा है। यहां भी कई चमत्कारी खबरें सामने आने लगी हैं। एक दो महीने के बच्चे को मलबे से निकाला गया। इसके बाद लोगों ने ताली बजाकर बच्चे का स्वागत किया। भूकंप के 128 घंटे बाद यानी लगभग पांच दिन बाद भी बच्चा जिंदा था। इसके अलावा मलबे में दबे लोगों को जब बाहर निकाला गया तो उन्हें यकीन नहीं हुआ कि वह जिंदा हैं। भूकंप के बाद यहां मौसम की भी मार पड़ रही है और कड़ाके की ठंड में राहत-बचाव का काम भी मुश्किल हो रहा है।

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