बीते लम्हें
वो मिट्टी के खिलौने वो सुकून भरी राते
वो यादे वो बाते
अध्यापक से कहा झूठ हो या मित्रो से किये वादे
सब बीते लम्हो की यादे है जो आज भी दिल को सुकूँ होठों को हंसी दे जाते है
वो शरारत वो हरकत
वो गुस्से की बरकत
हर खेल में लड़ना फिर अगले दिन वापिस गले मिलना
वो रूठना ओर ना मान ना
सब बीते लम्हों की यादे है
वो सारे दिन की उछ्लकूद
वो थकावट वो शाम
वो विद्यालय का अधुरा काम
वो तख्ती वो कलम
वो नीली काली स्याही का दवात
सब बीते लम्हों की यादे है
वो कागज की किश्ति वो हवा का जहाज
वो दोपहर का खाना वो ४ बजे वाली घंटी मै छुट्टी का आगाज़
सब महज कुछ बीते लम्हो की यादे है जो आज भी दिल को सकून ओर होंठों को हसी दे जाते है

निकिता वर्मा (शिमला)
शिमला

