शिक्षा में भेदभाव को सुप्रीम कोर्ट का झटका, यूजीसी नियमों पर रोक का डॉ. सुधा गुप्ता ने किया समर्थन

भारतीय जनता पार्टी बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ, ज़िला सोलन की पूर्व सदस्या डॉ. सुधा गुप्ता ने यूजीसी (UGC) द्वारा लाए गए नए भेदभाव विरोधी नियमों पर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का स्वागत किया है। उन्होंने इसे संविधान में निहित समानता के अधिकार की जीत बताते हुए कहा कि यह फैसला शिक्षा संस्थानों में सामाजिक समरसता बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम है।“अस्पष्ट नियमों से बढ़ता जातिगत विभाजन”प्रेस को जारी बयान में डॉ. सुधा गुप्ता ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों में कई गंभीर विसंगतियां थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा के मंदिरों में सभी छात्र समान होते हैं, लेकिन ये नियम एक विशेष वर्ग को संरक्षण देते हुए अन्य वर्गों की अनदेखी कर रहे थे।उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के दशकों बाद देश को समाज को जोड़ने वाले कानूनों की आवश्यकता है, न कि विभाजन को बढ़ावा देने वाले नियमों की।दुरुपयोग की आशंका पर जताई सहमतिडॉ. गुप्ता ने सीजेआई द्वारा जताई गई उस चिंता का समर्थन किया, जिसमें नियमों के दुरुपयोग की आशंका व्यक्त की गई है। उनका कहना था कि— की अस्पष्टता से शिक्षण संस्थानों में विवाद और वैमनस्य बढ़ सकता था।
- सामान्य वर्ग के मेधावी छात्र स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे थे।
- कानून ऐसा होना चाहिए जो जाति या वर्ग से ऊपर उठकर हर छात्र को समान सुरक्षा दे।
शीर्ष अदालत का आभार
डॉ. सुधा गुप्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर और नियमों पर रोक लगाकर देश के लाखों छात्रों के भविष्य एवं मानवाधिकारों की रक्षा की है। उन्होंने आशा जताई कि 19 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में भी न्यायोचित निर्णय आएगा, जिससे शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित राजनीति के बजाय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता मिलेगी।

